हर त्योहार उत्सव और शोर-शराबे का नहीं होता — ऋषि पंचमी उन गिने-चुने दिनों में से एक है जो शांति, आत्म-शुद्धि और सप्तऋषियों के प्रति कृतज्ञता के भाव से मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद माह की शुक्ल पंचमी को आता है, ठीक गणेश चतुर्थी के अगले ही दिन, और अक्सर हरतालिका तीज से जुड़ी परंपराओं के साथ भी मनाया जाता है।
2026 में तारीख और मुहूर्त
इस साल ऋषि पंचमी मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। पूर्वाह्न मुहूर्त सुबह करीब 8:40 बजे से 11:10 बजे के बीच सबसे उपयुक्त माना जा रहा है, हालांकि सटीक समय अपने शहर के पंचांग से जरूर मिला लें।

व्रत का मतलब और परंपरा
ऋषि पंचमी सप्तऋषियों — अत्रि, कश्यप, भारद्वाज, गौतम, विश्वामित्र, जमदग्नि और वशिष्ठ — को समर्पित है। मान्यता है कि इन सातों ऋषियों ने ज्ञान और धर्म को पीढ़ी दर पीढ़ी सहेजने का काम किया, इसलिए यह दिन उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए रखा गया है।
परंपरागत रूप से यह व्रत खासतौर पर महिलाओं द्वारा रखा जाता है, और इसे अनजाने में हुई किसी भी गलती या अशुद्धता के प्रायश्चित के तौर पर देखा जाता है। सुबह पवित्र नदी या तालाब में स्नान करने की परंपरा है — जहां संभव न हो, वहां घर पर ही शुद्ध जल से स्नान करके पूजा की जाती है। इस दिन कई लोग बिना हल के जोते गए अनाज या सब्ज़ियां खाना पसंद करते हैं, जिन्हें “ऋषि पंचमी भोजन” कहा जाता है।
व्रत कथा और मान्यता
ऋषि पंचमी की कथा एक ऐसी स्त्री की बताई जाती है जिसने अनजाने में मासिक धर्म के दौरान घर के बर्तन छू लिए थे, जिस वजह से अगले जन्म में उसे कीड़े के रूप में जन्म लेना पड़ा। बाद में सप्तऋषियों की कृपा और इस व्रत के प्रभाव से उसे मुक्ति मिली। इस कथा के पीछे का मूल भाव यह है कि दैनिक जीवन में अनजाने में हुई चूक के लिए भी प्रायश्चित और शुद्धि का रास्ता मौजूद है। इसी मान्यता के चलते इस दिन को खासतौर पर महिलाएं शारीरिक और मानसिक शुद्धि के व्रत के रूप में मनाती हैं।
जिन भक्तों के पास नदी में स्नान की सुविधा नहीं होती, वे घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं और उतनी ही श्रद्धा से पूजा संपन्न करते हैं — मान्यता है कि भाव सच्चा हो तो स्थान मायने नहीं रखता।
पूजा कैसे की जाती है
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर सप्तऋषियों की तस्वीर या प्रतीक के सामने दीप जलाया जाता है। फूल, अक्षत और फल अर्पित करने के बाद ऋषि पंचमी की कथा सुनी या पढ़ी जाती है। जो लोग पूरे दिन का व्रत रखते हैं, वे शाम की पूजा के बाद ही फलाहार करते हैं।
संदेश जो इस दिन के भाव से मेल खाते हैं
चूंकि यह पर्व उत्सव से ज़्यादा श्रद्धा और आत्मशुद्धि का है, इसलिए इस दिन भेजे जाने वाले संदेश भी आमतौर पर संक्षिप्त और सम्मानपूर्ण होते हैं, न कि बड़े धूमधाम वाले।
- सप्तऋषियों का आशीर्वाद आपके जीवन में ज्ञान और शुद्धता लाए। ऋषि पंचमी की शुभकामनाएं।
- इस व्रत के पुण्य से आपके जीवन के सारे दोष दूर हों।
- ऋषि पंचमी पर सप्तऋषियों को नमन, आपका व्रत सफल हो।
- ज्ञान और तप के मार्ग पर चलने वाले ऋषियों को कोटि-कोटि प्रणाम।
अलग-अलग क्षेत्रों में मान्यता
उत्तर भारत के कई हिस्सों में ऋषि पंचमी को हरतालिका तीज के अगले दिन आने वाले शांत, आत्ममंथन के पर्व के रूप में देखा जाता है, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ समुदायों में इसे “ऋषि पंचमी व्रत” के रूप में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है। नेपाल में यह एक सार्वजनिक अवकाश है, जहां महिलाएं समूह में नदी स्नान के लिए जाती हैं और सामूहिक रूप से व्रत कथा सुनती हैं। भारत में यह पर्व उतना सार्वजनिक उत्सव नहीं है जितना गणेश चतुर्थी या रक्षाबंधन, बल्कि यह ज्यादातर घर की चारदीवारी के भीतर, निजी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है — यही वजह है कि इसके बारे में जानकारी भी बाकी बड़े त्योहारों जितनी आसानी से नहीं मिलती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ऋषि पंचमी और हरतालिका तीज में क्या फर्क है, यह सवाल कई लोगों के मन में आता है — दोनों पर्व लगभग साथ-साथ आते हैं, लेकिन हरतालिका तीज सुहाग और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है, जबकि ऋषि पंचमी का व्रत आत्मशुद्धि और सप्तऋषियों के सम्मान के लिए होता है।
यह भी पूछा जाता है कि क्या यह व्रत सिर्फ महिलाएं ही रख सकती हैं — परंपरागत रूप से यह व्रत महिलाओं द्वारा अधिक रखा जाता है, लेकिन कई परिवारों में पुरुष भी श्रद्धा के साथ इसमें शामिल होते हैं।
ऋषि पंचमी 2026 की तारीख को लेकर असमंजस हो तो ध्यान रखें — यह हमेशा गणेश चतुर्थी के अगले दिन पड़ती है, इस साल यानी 15 सितंबर, मंगलवार।
सप्तऋषियों का आशीर्वाद आप पर और आपके परिवार पर सदा बना रहे।

आयुष खुराना, TyoharWishes.in के संस्थापक और मुख्य कंटेंट राइटर हैं, जो दिल्ली से हैं। वे 2026 से त्योहारों, शुभकामनाओं और खास मौकों से जुड़ा हिंदी कंटेंट लिख रहे हैं, और हर लेख प्रकाशित करने से पहले तारीख व परंपरा से जुड़ी जानकारी को सही स्रोतों से जांचते हैं। उनका मकसद है कि पाठकों को हर मौके के लिए सरल, असरदार और भरोसेमंद संदेश आसानी से मिल सकें — बिना किसी और वेबसाइट से कॉपी किए। किसी भी सुझाव या सुधार के लिए आप उनसे Contact Us पेज के जरिए संपर्क कर सकते हैं।
