गणपति बप्पा को घर लाना जितना उत्साह भरा पल होता है, उतना ही जरूरी है पूजा की विधि को सही तरीके से समझना — क्योंकि स्थापना से लेकर रोज़ की आरती और अंत में विसर्जन तक, हर चरण का अपना महत्व है। इस लेख में हम सिर्फ पूजा की पूरी प्रक्रिया पर फोकस करेंगे — तारीख और त्योहार के महत्व की जानकारी के लिए हमारा गणेश चतुर्थी शुभकामना लेख पढ़ें।
2026 में स्थापना मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को है। मूर्ति स्थापना के लिए मध्याह्न मुहूर्त सुबह करीब 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे के बीच सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। चूंकि यह समय शहर के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है, इसलिए स्थापना से एक दिन पहले अपने स्थानीय पंचांग से सटीक समय जरूर कन्फर्म कर लें।
पूजा के लिए जरूरी सामग्री
| सामग्री | मात्रा/नोट |
|---|---|
| गणेश जी की मूर्ति (मिट्टी की) | 1 |
| चौकी और लाल/पीला कपड़ा | 1 |
| दूर्वा घास | 21 गांठें |
| लाल फूल और फूल माला | आवश्यकतानुसार |
| मोदक या लड्डू | कम से कम 21 |
| रोली, चावल (अक्षत), हल्दी | पूजा थाली के लिए |
| दीपक, घी/तेल, बाती | आरती के लिए |
| धूप, अगरबत्ती | |
| नारियल, पान का पत्ता, सुपारी | |
| कलश और आम के पत्ते | संकल्प के लिए |

स्थापना की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
चरण 1: स्थान और चौकी तैयार करना घर में उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। चौकी को साफ करके उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं, और चारों तरफ रंगोली या फूलों से सजाएं।
चरण 2: मूर्ति स्थापना शुभ मुहूर्त में मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें। स्थापना से पहले मूर्ति को गंगाजल या शुद्ध जल से पवित्र करें।
चरण 3: प्राण प्रतिष्ठा और संकल्प हाथ में अक्षत और जल लेकर संकल्प लें कि आप कितने दिनों के लिए पूजा करेंगे (डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिन)। इसके बाद प्राण प्रतिष्ठा मंत्र के साथ मूर्ति में भगवान का आवाहन करें — यह चरण किसी पंडित की सहायता से करना उचित रहता है।
चरण 4: षोडशोपचार पूजा इसमें सोलह चरणों में पूजा की जाती है — स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग) और आरती। हर घर में इसका पूरा विस्तार जरूरी नहीं, संक्षिप्त विधि से भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।
चरण 5: भोग और आरती मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें, फिर “जय गणेश देवा” आरती के साथ पूजा संपन्न करें। आरती के बाद प्रसाद परिवार में बांटें।
घर की पूजा और सार्वजनिक पंडाल की पूजा में फर्क
घर पर की जाने वाली पूजा आमतौर पर संक्षिप्त और पारिवारिक होती है, जिसमें ऊपर बताए गए चरण पर्याप्त माने जाते हैं। इसके उलट, सार्वजनिक पंडालों में पूजा का स्वरूप कहीं बड़ा होता है — वहां रोज़ सुबह-शाम विस्तृत आरती, भजन-कीर्तन और सामूहिक भोग वितरण होता है, और अक्सर पूरे दस दिन एक या अधिक पंडित नियमित रूप से पूजा संभालते हैं। अगर आप किसी सोसायटी या मोहल्ले की सामूहिक पूजा में हिस्सा ले रहे हैं, तो वहां की समिति द्वारा तय रोज़ की पूजा और आरती के समय का पालन करना पर्याप्त रहता है, अलग से घर पर पूरी विधि दोहराने की जरूरत नहीं होती।
रोज़ की पूजा में क्या करें
स्थापना के बाद जितने दिन मूर्ति घर में रहती है, हर दिन सुबह-शाम आरती करना, ताज़े फूल और दूर्वा चढ़ाना, और भोग अर्पित करना जरूरी माना जाता है। दूर्वा गणेश जी को विशेष प्रिय मानी जाती है, इसलिए रोज़ 21 दूर्वा गांठें चढ़ाने की परंपरा है।
विसर्जन की विधि
चरण 1: अंतिम पूजा और आरती विसर्जन वाले दिन सुबह अंतिम बार पूरी विधि से पूजा और आरती करें।
चरण 2: उत्तर पूजा मूर्ति को स्थान से हटाने से पहले “उत्तर पूजा” की जाती है, जिसमें भगवान से अगले साल फिर आने की प्रार्थना की जाती है।
चरण 3: विसर्जन मूर्ति को श्रद्धापूर्वक नदी, तालाब या कृत्रिम टैंक में विसर्जित करें। मिट्टी की मूर्ति चुनना पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह पानी में आसानी से घुल जाती है, जबकि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां प्रदूषण बढ़ाती हैं।
आम गलतियां जिनसे बचें
- मूर्ति स्थापना से पहले हाथ धोए बिना पूजा सामग्री छूना
- संकल्प लिए बिना ही पूजा शुरू कर देना — इससे पूजा अधूरी मानी जाती है
- स्थापना के बाद रोज़ की आरती में लापरवाही करना
- प्लास्टिक या केमिकल रंग वाली मूर्ति का इस्तेमाल करना, जो जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाती है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर पर पंडित के बिना पूजा की जा सकती है — हां, अगर आपको मंत्र और विधि की जानकारी है तो घर पर स्वयं भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है, हालांकि प्राण प्रतिष्ठा के लिए पंडित की सहायता लेना बेहतर माना जाता है।
कितने दिन तक मूर्ति रखनी चाहिए — यह पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है, डेढ़ दिन से लेकर पूरे दस दिन तक, सभी तरीके प्रचलित और स्वीकार्य हैं।
अगर मुहूर्त में स्थापना न कर पाएं तो क्या करें — मुहूर्त सबसे उपयुक्त समय बताता है, लेकिन अगर परिस्थितिवश ऐसा संभव न हो, तो श्रद्धा भाव से किसी भी शुभ समय पर स्थापना की जा सकती है।
आपकी गणेश पूजा सफल और मंगलमय हो। गणपति बप्पा मोरया!

आयुष खुराना, TyoharWishes.in के संस्थापक और मुख्य कंटेंट राइटर हैं, जो दिल्ली से हैं। वे 2026 से त्योहारों, शुभकामनाओं और खास मौकों से जुड़ा हिंदी कंटेंट लिख रहे हैं, और हर लेख प्रकाशित करने से पहले तारीख व परंपरा से जुड़ी जानकारी को सही स्रोतों से जांचते हैं। उनका मकसद है कि पाठकों को हर मौके के लिए सरल, असरदार और भरोसेमंद संदेश आसानी से मिल सकें — बिना किसी और वेबसाइट से कॉपी किए। किसी भी सुझाव या सुधार के लिए आप उनसे Contact Us पेज के जरिए संपर्क कर सकते हैं।
