दशहरा या विजयादशमी नवरात्रि के नौ दिनों के बाद आने वाला वह दिन है जब बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन की पूजा तीन अलग-अलग हिस्सों में बंटी होती है — अस्त्र-शस्त्र पूजा, शमी वृक्ष पूजन, और रावण दहन — और हर एक का अपना अलग महत्व और विधि है।
2026 में तारीख और मुहूर्त
इस साल दशहरा 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। विजय मुहूर्त दोपहर करीब 2:00 बजे से 2:46 बजे के बीच सबसे शुभ माना जा रहा है, जबकि अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1:14 बजे से 3:32 बजे तक रहेगा। कोई भी नया काम शुरू करने के लिए विजय मुहूर्त को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

अस्त्र-शस्त्र पूजा (आयुध पूजा)
महत्व: प्राचीन काल में योद्धा युद्ध पर जाने से पहले अपने हथियारों की पूजा करते थे। आज के समय में यह परंपरा व्यापक रूप में बदल गई है — किसान अपने औज़ारों की, कारीगर अपने उपकरणों की, और कई पेशों में लोग अपने काम के औज़ारों या वाहन की पूजा करते हैं।
विधि:
- औज़ार, हथियार या मशीन को साफ करके एक जगह इकट्ठा करें
- उन्हें फूल-माला से सजाएं और तिलक लगाएं
- धूप-दीप दिखाकर आरती करें
- मिठाई का भोग अर्पित करें
शमी वृक्ष पूजन
महत्व: शमी वृक्ष को विजय और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष पर ही छिपाए थे, और वापस लेने के बाद इसी वृक्ष की पूजा की थी।
विधि:
- शाम के समय शमी वृक्ष के पास जाएं
- वृक्ष पर जल अर्पित करें और दीपक जलाएं
- वृक्ष की परिक्रमा करें
- शमी के पत्तों को “सोना” मानकर परिवार और मित्रों को भेंट करें, जो सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है
रावण दहन
महत्व: यह दशहरे का सबसे भव्य और सार्वजनिक हिस्सा है, जो भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक है। बड़े मैदानों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले बनाकर जलाए जाते हैं।
कैसे मनाया जाता है: शाम के समय, विजय मुहूर्त के आसपास, रामलीला मैदानों में भगवान राम के प्रतीकात्मक तीर से पुतलों में आग लगाई जाती है। पटाखों से भरे ये पुतले देखते ही देखते जलकर राख हो जाते हैं, और उपस्थित भीड़ “जय श्री राम” के नारों से मैदान गुंजा देती है।
घर पर मनाने वालों के लिए इतना भव्य आयोजन जरूरी नहीं — परिवार के साथ मिलकर रामायण की कथा पढ़ना या भगवान राम की आरती करना भी इस दिन की भावना को उतनी ही श्रद्धा से जीने का तरीका है।
हर राज्य में दशहरे का अपना रंग
उत्तर भारत में जहां रावण दहन और रामलीला सबसे बड़ा आकर्षण होते हैं, वहीं मैसूर का दशहरा पूरी तरह अलग अंदाज़ में मनाया जाता है — यहां शाही हाथियों का जुलूस और महल की भव्य सजावट इस उत्सव की पहचान है, जो कर्नाटक सरकार द्वारा राजकीय उत्सव के रूप में आयोजित किया जाता है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में दशहरा असल में बाकी जगहों के खत्म होने के बाद शुरू होता है और सात दिनों तक चलता है, जिसमें सैकड़ों गांव देवताओं की पालकियां लेकर एक बड़े मेले में शामिल होते हैं। पश्चिम बंगाल में यह दिन दुर्गा पूजा के विसर्जन के साथ जुड़ा होता है, जहां देवी दुर्गा की भव्य मूर्तियों को नदी में विसर्जित किया जाता है। यह विविधता दिखाती है कि बुराई पर अच्छाई की जीत का यह पर्व हर क्षेत्र में अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ मनाया जाता है।
दिन भर की पूजा का सुझाया गया क्रम
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| सुबह | दुर्गा विसर्जन (अगर घर में मूर्ति स्थापित थी) |
| दोपहर | अस्त्र-शस्त्र पूजा |
| शाम (विजय मुहूर्त) | शमी पूजन |
| रात | रावण दहन देखना या रामायण पाठ |
ध्यान रखने वाली बातें
- अस्त्र-शस्त्र पूजा में असली हथियार के बजाय अगर कोई खतरनाक औज़ार हो, तो उसे सावधानी से संभालें
- शमी के पत्ते तोड़ते समय वृक्ष को नुकसान न पहुंचाएं, सिर्फ जरूरत जितने पत्ते ही लें
- सार्वजनिक रावण दहन देखने जा रहे हों तो भीड़ और पटाखों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, खासकर बच्चों के साथ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या दशहरे पर नया काम शुरू करना शुभ माना जाता है — हां, विजय मुहूर्त को साल के सबसे शुभ समयों में गिना जाता है, इसलिए नई दुकान, नया वाहन या कोई भी नई शुरुआत के लिए यह दिन बहुत उपयुक्त माना जाता है।
अस्त्र पूजा सिर्फ हथियारों के लिए है या सामान्य औज़ारों के लिए भी — आजकल इसे व्यापक अर्थ में लिया जाता है, यानी अपने पेशे से जुड़े किसी भी औज़ार, मशीन, वाहन या उपकरण की पूजा इसी परंपरा का हिस्सा मानी जाती है।
अगर पास में शमी का वृक्ष न मिले तो क्या करें — कुछ लोग इस स्थिति में शमी के पत्तों की तस्वीर या किसी मंदिर में उपलब्ध शमी पत्तों का इस्तेमाल कर लेते हैं, हालांकि जहां तक संभव हो असली वृक्ष के पास जाकर पूजा करना ज्यादा उचित माना जाता है।
आपका दशहरा शुभ हो, बुराई पर अच्छाई की यह जीत आपके जीवन में भी नई शुरुआत लाए।

आयुष खुराना, TyoharWishes.in के संस्थापक और मुख्य कंटेंट राइटर हैं, जो दिल्ली से हैं। वे 2026 से त्योहारों, शुभकामनाओं और खास मौकों से जुड़ा हिंदी कंटेंट लिख रहे हैं, और हर लेख प्रकाशित करने से पहले तारीख व परंपरा से जुड़ी जानकारी को सही स्रोतों से जांचते हैं। उनका मकसद है कि पाठकों को हर मौके के लिए सरल, असरदार और भरोसेमंद संदेश आसानी से मिल सकें — बिना किसी और वेबसाइट से कॉपी किए। किसी भी सुझाव या सुधार के लिए आप उनसे Contact Us पेज के जरिए संपर्क कर सकते हैं।
