दिवाली की रात लक्ष्मी पूजा सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि साल भर की मेहनत के बाद घर में सुख-समृद्धि का स्वागत करने का सबसे महत्वपूर्ण पल माना जाता है। सही मुहूर्त, सही सामग्री और सही क्रम में की गई यह पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक स्थिरता लाने की मान्यता से जुड़ी है।
2026 में तारीख और मुहूर्त
दिवाली और लक्ष्मी पूजा इस साल 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का प्रदोष काल मुहूर्त शाम करीब 5:32 बजे से 7:28 बजे के बीच बताया जा रहा है, हालांकि यह समय हर शहर में अलग होता है — जैसे मुंबई में यह करीब 6:05 बजे से 8:04 बजे तक, और कोलकाता में इससे थोड़ा पहले शुरू होता है। पूजा से पहले अपने शहर का सटीक मुहूर्त जरूर देख लें।

दिवाली के पांच दिन — संक्षेप में
लक्ष्मी पूजा दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव का तीसरा और सबसे मुख्य दिन है — धनतेरस (6 नवंबर), छोटी दिवाली (7 नवंबर), लक्ष्मी पूजा/दिवाली (8 नवंबर), गोवर्धन पूजा (9 नवंबर), और भाई दूज (10 नवंबर)। इस लेख में हम खासतौर पर मुख्य दिन की लक्ष्मी पूजा विधि पर फोकस करेंगे।
पूजा के लिए जरूरी सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति/तस्वीर | मुख्य पूजा के लिए |
| चौकी और लाल कपड़ा | मूर्ति स्थापना के लिए |
| कमल या गुलाब के फूल | देवी को अर्पित करने के लिए |
| दीपक (मिट्टी के) और घी/तेल | घर भर में जलाने के लिए |
| रोली, चावल (अक्षत), हल्दी | पूजा थाली के लिए |
| मिठाई और सूखे मेवे | भोग के लिए |
| सिक्के और नई नोट (जिसे पूजा जाए) | समृद्धि के प्रतीक के तौर पर |
| कलश और नारियल | |
| खील-बताशे | पारंपरिक भोग का हिस्सा |
| झाड़ू (नई) | कुछ परंपराओं में पूजा जाता है, समृद्धि का प्रतीक |
पूजा से पहले की तैयारी
लक्ष्मी पूजा से पहले पूरे घर की सफाई करना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि देवी लक्ष्मी सिर्फ साफ-सुथरे और रोशनी से भरे घर में ही प्रवेश करती हैं। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाना और दीये जलाना इसी परंपरा का हिस्सा है, ताकि देवी को घर का रास्ता आसानी से दिखे।
लक्ष्मी पूजा की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
चरण 1: चौकी और मूर्ति की स्थापना पूजा स्थान पर चौकी बिछाकर उस पर लाल कपड़ा रखें। लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर एक साथ स्थापित करें — गणेश जी हमेशा लक्ष्मी जी के दाईं ओर रखे जाते हैं।
चरण 2: कलश स्थापना मूर्ति के पास जल से भरा कलश रखें, जिस पर आम के पत्ते और नारियल सजाएं।
चरण 3: दीप प्रज्वलन सबसे पहले एक मुख्य दीपक जलाएं, फिर घर के हर कोने में छोटे दीये जलाना शुरू करें ताकि पूरा घर रोशनी से भर जाए।
चरण 4: षोडशोपचार पूजा मूर्ति को स्नान कराकर, नए वस्त्र और आभूषण अर्पित करें, फिर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं। इसके बाद फूल, धूप और भोग अर्पित करें।
चरण 5: सिक्कों और खाता-बही की पूजा व्यापारी परिवारों में इस चरण में नए साल के खाता-बही (जो नए व्यापारिक वर्ष के हिसाब-किताब के लिए इस्तेमाल होते हैं) और सिक्कों की पूजा की जाती है।
चरण 6: लक्ष्मी आरती “ॐ जय लक्ष्मी माता” आरती के साथ पूजा का समापन करें, और घंटी बजाते हुए पूरे परिवार के साथ आरती में शामिल हों।
चरण 7: प्रसाद वितरण और पटाखे आरती के बाद प्रसाद परिवार में बांटें। परंपरा अनुसार इसके बाद पटाखे जलाने का भी रिवाज है, हालांकि प्रदूषण को देखते हुए आजकल कई परिवार इसे सीमित या ईको-फ्रेंडली विकल्पों से बदल रहे हैं।
मिट्टी के दीये बनाम इलेक्ट्रिक लाइट्स
पिछले कुछ सालों में घरों की सजावट में एलईडी लाइट्स और सीरियल बल्ब का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन पारंपरिक रूप से मिट्टी के दीये जलाना ज्यादा शुभ माना जाता है, क्योंकि यह पंचतत्वों (मिट्टी, अग्नि, वायु) से जुड़ा एक जीवंत प्रतीक है, जबकि बिजली की लाइटें सिर्फ सजावट का काम करती हैं। कई परिवार अब दोनों का मेल अपनाते हैं — घर की बाहरी सजावट के लिए लाइटें, और पूजा स्थान व मुख्य द्वार पर पारंपरिक मिट्टी के दीये। स्थानीय कुम्हारों से दीये खरीदना न सिर्फ परंपरा को बनाए रखता है, बल्कि उनकी आजीविका में भी सीधे योगदान देता है, जो इस त्योहार की मूल भावना — साझा समृद्धि — से भी मेल खाता है।

ध्यान रखने वाली बातें
- पूजा के दौरान घर की सारी लाइटें बंद करके सिर्फ दीयों की रोशनी में पूजा करना पारंपरिक रूप से ज्यादा शुभ माना जाता है
- पटाखे जलाते समय बच्चों और बुज़ुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें
- मिट्टी के दीये और सामग्री का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लक्ष्मी पूजा में गणेश जी की पूजा क्यों जरूरी है — गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए किसी भी नई शुरुआत या पूजा से पहले उनकी पूजा करना शुभ माना जाता है, इसी वजह से लक्ष्मी पूजा में भी उन्हें साथ पूजा जाता है।
क्या ऑफिस या दुकान में भी लक्ष्मी पूजा की जा सकती है — हां, व्यापारी वर्ग के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, और दुकान या ऑफिस में भी उतनी ही श्रद्धा से पूजा की जाती है, खासकर खाता-बही पूजन के साथ।
अगर मुहूर्त के समय पूजा न कर पाएं तो क्या करें — प्रदोष काल का मुहूर्त सबसे उपयुक्त माना जाता है, लेकिन अगर परिस्थितिवश यह संभव न हो, तो निशिता काल (आधी रात के आसपास) में भी पूजा की जा सकती है।
आपका घर लक्ष्मी जी की कृपा से सदा समृद्ध और खुशियों से भरा रहे। शुभ दीपावली!

आयुष खुराना, TyoharWishes.in के संस्थापक और मुख्य कंटेंट राइटर हैं, जो दिल्ली से हैं। वे 2026 से त्योहारों, शुभकामनाओं और खास मौकों से जुड़ा हिंदी कंटेंट लिख रहे हैं, और हर लेख प्रकाशित करने से पहले तारीख व परंपरा से जुड़ी जानकारी को सही स्रोतों से जांचते हैं। उनका मकसद है कि पाठकों को हर मौके के लिए सरल, असरदार और भरोसेमंद संदेश आसानी से मिल सकें — बिना किसी और वेबसाइट से कॉपी किए। किसी भी सुझाव या सुधार के लिए आप उनसे Contact Us पेज के जरिए संपर्क कर सकते हैं।
