करवा चौथ व्रत विधि 2026

करवा चौथ व्रत विधि 2026: सरगी से चांद देखने तक पूरा दिन कैसे बिताएं

करवा चौथ का व्रत सुबह सूरज निकलने से पहले शुरू होता है और रात को चांद देखने के बाद ही खत्म होता है — यानी लगभग 14 घंटे का निर्जला व्रत। इतने लंबे व्रत को सही तरीके से निभाने के लिए यह जानना जरूरी है कि दिन का हर हिस्सा किस क्रम में और कैसे बिताया जाए।

करवा चौथ व्रत विधि 2026

2026 में तारीख

इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। चांद निकलने का सही समय शहर के हिसाब से अलग-अलग होता है — दिल्ली-आगरा जैसे उत्तर भारतीय शहरों में चांद रात करीब 8:12 बजे के आसपास दिखने की उम्मीद है, जबकि पूर्वी शहरों (कोलकाता) में यह थोड़ा पहले, करीब 7:42 बजे दिख सकता है। व्रत खोलने से पहले अपने शहर का सटीक चंद्रोदय समय पंचांग या स्थानीय स्रोत से जरूर चेक कर लें।

दिन की शुरुआत: सरगी

व्रत से पहले सुबह सूर्योदय से पहले “सरगी” खाई जाती है, जो आमतौर पर सास अपनी बहू को देती हैं। सरगी में हल्का लेकिन पौष्टिक भोजन शामिल होता है, जैसे फेनी, मठरी, फल, मेवे और दूध, ताकि पूरे दिन के निर्जला व्रत के लिए शरीर को थोड़ी ऊर्जा मिल सके। सरगी सूर्योदय से पहले खत्म कर लेनी चाहिए, क्योंकि इसके बाद पूरे दिन कुछ भी खाने-पीने की मनाही होती है।

दिन भर व्रत के दौरान

निर्जला व्रत का मतलब है पानी की एक बूंद भी न लेना। जिन महिलाओं को स्वास्थ्य समस्या है — जैसे लो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, या जो गर्भवती हैं — उनके लिए डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत रखना जोखिम भरा हो सकता है, ऐसे में फलाहार या सिर्फ जल के साथ व्रत रखना बेहतर विकल्प है। दिन के दौरान महिलाएं अक्सर मेहंदी लगाती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और घर की तैयारियों में व्यस्त रहती हैं।

शाम की पूजा के लिए जरूरी सामग्री

सामग्रीउपयोग
करवा (मिट्टी या धातु का लोटा)पूजा और कथा के लिए
छलनीचांद देखते समय
दीपक और घीआरती और छलनी में रखने के लिए
मिठाई और फलभोग के लिए
सिंदूर, चूड़ियां, श्रृंगार सामग्रीपूजा थाली में रखने के लिए
गेहूं या चावलपूजा में अर्पित करने के लिए
करवा चौथ कथा की किताबकथा सुनने के लिए

शाम की पूजा विधि

चरण 1: सामूहिक पूजा के लिए इकट्ठा होना शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार करके एक साथ बैठकर पूजा करती हैं, चाहे यह घर पर हो या पड़ोस के किसी सामूहिक आयोजन में।

चरण 2: करवा चौथ की कथा सुनना पूजा शुरू होने पर करवा चौथ की कथा सुनी या पढ़ी जाती है, जिसमें पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने की परंपरा और उसके पीछे की मान्यता बताई जाती है।

चरण 3: करवा और थाली की पूजा करवा में जल भरकर उसकी पूजा की जाती है, और थाली में दीपक, सिंदूर, मिठाई सजाकर रखी जाती है।

चरण 4: चांद देखने की प्रतीक्षा चांद निकलने के करीब सभी महिलाएं छत या खुली जगह पर इकट्ठा होती हैं।

चरण 5: चांद को अर्घ्य और छलनी की रस्म चांद दिखते ही सबसे पहले छलनी से चांद को देखा जाता है, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखा जाता है। इसके बाद चांद को जल अर्पित (अर्घ्य) किया जाता है।

चरण 6: पति के हाथों व्रत खोलना पति पत्नी को पानी पिलाकर और पहला निवाला खिलाकर व्रत खुलवाते हैं। इसके बाद ही सामान्य भोजन शुरू किया जाता है।

अलग-अलग राज्यों में परंपरा में फर्क

पंजाब और हरियाणा में करवा चौथ को बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है, जहां “बाया” की परंपरा भी निभाई जाती है — इसमें सास अपनी बहू के लिए मिठाई, कपड़े और श्रृंगार सामग्री का एक विशेष उपहार सेट भेजती है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी यह व्रत उसी श्रद्धा से मनाया जाता है, हालांकि सरगी और पूजा की सामग्री में क्षेत्रीय अंतर देखने को मिल सकता है। दक्षिण भारत के ज्यादातर राज्यों में यह व्रत पारंपरिक रूप से प्रचलित नहीं है, लेकिन बदलते समय के साथ शहरी क्षेत्रों में अब वहां भी युवा जोड़े इसे अपनाने लगे हैं।

आम गलतियां जिनसे बचें

  • सरगी खाना भूल जाना या सूर्योदय के बाद खाना, जिससे पूरे दिन कमजोरी महसूस हो सकती है
  • चांद देखने से पहले जल्दबाज़ी में व्रत खोल लेना
  • तबीयत बिगड़ने पर भी निर्जला व्रत जारी रखने की जिद करना — ऐसे में फलाहार अपनाना ज्यादा समझदारी है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगर बादलों की वजह से चांद न दिखे तो क्या करें — ऐसी स्थिति में पंचांग में बताए गए चंद्रोदय के अनुमानित समय के आधार पर पूजा और अर्घ्य की रस्म पूरी की जा सकती है, या मोबाइल ऐप्स की मदद से चांद की स्थिति देखी जा सकती है।

क्या अविवाहित लड़कियां भी करवा चौथ रख सकती हैं — परंपरागत रूप से यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति के लिए रखती हैं, हालांकि कुछ क्षेत्रों में मंगेतर के लिए भी यह व्रत रखने की परंपरा देखी जाती है।

निर्जला व्रत के दौरान चक्कर या कमजोरी महसूस हो तो क्या करें — तुरंत व्रत को फलाहार में बदल लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें, सेहत को जोखिम में डालना किसी भी परंपरा से ज्यादा जरूरी नहीं।

आपका करवा चौथ व्रत सफल हो और आपके दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे।

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