गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ दस दिन का उत्सव अनंत चतुर्दशी पर अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचता है। जिन घरों और पंडालों में गणपति की स्थापना दस दिन के लिए हुई थी, वहां इसी दिन अंतिम विसर्जन होता है। लेकिन अनंत चतुर्दशी सिर्फ गणेश विसर्जन तक सीमित नहीं है — यह भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित एक स्वतंत्र व्रत भी है, जिसकी अपनी अलग परंपरा और कथा है।
2026 में तारीख

इस साल अनंत चतुर्दशी शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, जो भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि पर आती है।
अनंत सूत्र की परंपरा
इस दिन की सबसे खास परंपरा है अनंत सूत्र या “अनंत का धागा” बांधना — रेशम या सूती धागे में चौदह गांठें लगाकर इसे भगवान विष्णु की पूजा के बाद हाथ में बांधा जाता है। यह चौदह गांठें चौदह लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं। महाभारत काल की एक कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना राज्य हार गए थे, तब भगवान कृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने यह व्रत रखा था, और इसी के प्रभाव से उन्हें बाद में अपना राज्य वापस मिला। इसी वजह से अनंत चतुर्दशी को खोई हुई समृद्धि और सौभाग्य को फिर से पाने का व्रत माना जाता है।
विसर्जन का दिन भी है यही
जिन घरों में गणपति की स्थापना पूरे दस दिन के लिए हुई थी, वहां इसी दिन बड़े स्तर पर विसर्जन जुलूस निकलता है। मुंबई, पुणे जैसे शहरों में यह दिन साल का सबसे भावुक और भव्य नज़ारा पेश करता है — सड़कों पर ढोल-ताशों की गूंज, “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” के नारे, और नदी या समुद्र तट तक जाने वाला लंबा जुलूस। कई जगहों पर अब सामूहिक और कृत्रिम टैंकों में विसर्जन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि जल प्रदूषण कम हो।
इस तरह अनंत चतुर्दशी एक ही दिन में दो अलग-अलग भावनाएं समेटे रहती है — एक तरफ भगवान विष्णु के अनंत रूप की शांत, पारिवारिक पूजा, और दूसरी तरफ गणपति की विदाई का भावुक, सार्वजनिक उत्सव।
हर राज्य में विसर्जन का अपना अंदाज़
महाराष्ट्र में जहां यह दिन ढोल-ताशों और सड़कों पर उमड़ी भीड़ के लिए जाना जाता है, वहीं कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में गणेश विसर्जन को “गणेश निमज्जनम” कहा जाता है और इसे थोड़े शांत, पारंपरिक अंदाज़ में मनाया जाता है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में तो गणेश उत्सव उतना बड़ा नहीं होता जितना दुर्गा पूजा, इसलिए वहां अनंत चतुर्दशी का व्रत पक्ष ही ज्यादा प्रमुख रहता है, विसर्जन का पक्ष उतना नहीं। यह विविधता दिखाती है कि एक ही तारीख को मनाया जाने वाला यह पर्व हर क्षेत्र में अपनी स्थानीय परंपरा के हिसाब से ढल जाता है।
अनंत सूत्र भी परंपरा के अनुसार अलग-अलग सामग्री से बनाया जा सकता है — कहीं इसे रेशम के धागे से बनाया जाता है, तो कहीं कुश (एक पवित्र घास) से। दोनों ही रूपों में चौदह गांठों का महत्व एक समान रहता है, और पूजा के बाद इसे तब तक हाथ में बांधे रखा जाता है जब तक यह अपने आप घिसकर टूट न जाए।
व्रत और पूजा विधि
सुबह स्नान के बाद एक चौकी पर कलश स्थापित कर उसमें भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखी जाती है। अनंत सूत्र को पूजा में रखकर उसकी पूजा की जाती है, फिर उसे पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं। पूजा के दौरान अनंत चतुर्दशी की कथा सुनना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि इसी कथा से व्रत की पूर्णता जुड़ी मानी जाती है।
शुभकामना संदेश
- अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं, भगवान विष्णु का अनंत आशीर्वाद आप पर बना रहे।
- अनंत सूत्र आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की गांठें बांधे रखे।
- गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या — बप्पा की विदाई पर यही कामना है कि वे जल्द लौटें।
- जैसे युधिष्ठिर को इस व्रत से उनका खोया राज्य वापस मिला, वैसे ही आपकी हर मुश्किल आसान हो।
छोटे स्टेटस और मैसेज के लिए: “अनंत चतुर्दशी मुबारक 🙏”, “गणपति बप्पा मोरया 🐘”, “विष्णु कृपा सदा बनी रहे।”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनंत सूत्र कौन बांध सकता है — यह सवाल अक्सर आता है, और इसका जवाब है कि स्त्री-पुरुष दोनों इसे बांध सकते हैं, बस बांधने का हाथ अलग होता है।
एक और आम सवाल यह है कि क्या अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन एक ही दिन जरूरी है — यह इस बात पर निर्भर करता है कि घर में गणपति की स्थापना कितने दिनों के लिए की गई थी, दस दिन की स्थापना पर ही विसर्जन इसी तारीख को आता है।
यह भी पूछा जाता है कि अगर अनंत सूत्र बीच में टूट जाए तो क्या करें — परंपरा के अनुसार इसे दोबारा बांधने की जरूरत नहीं होती, इसे अगले साल की पूजा तक वैसे ही छोड़ दिया जाता है, क्योंकि इसका टूटना अशुभ नहीं बल्कि व्रत के स्वाभाविक पूर्ण होने का संकेत माना जाता है।
आपके जीवन में अनंत खुशियां बनी रहें, यही शुभकामना है।

आयुष खुराना, TyoharWishes.in के संस्थापक और मुख्य कंटेंट राइटर हैं, जो दिल्ली से हैं। वे 2026 से त्योहारों, शुभकामनाओं और खास मौकों से जुड़ा हिंदी कंटेंट लिख रहे हैं, और हर लेख प्रकाशित करने से पहले तारीख व परंपरा से जुड़ी जानकारी को सही स्रोतों से जांचते हैं। उनका मकसद है कि पाठकों को हर मौके के लिए सरल, असरदार और भरोसेमंद संदेश आसानी से मिल सकें — बिना किसी और वेबसाइट से कॉपी किए। किसी भी सुझाव या सुधार के लिए आप उनसे Contact Us पेज के जरिए संपर्क कर सकते हैं।
