Kajari Teej Wishes in Hindi

कजरी तीज 2026: सावन की फुहारों में गाए जाने वाले कजरी गीतों का त्योहार

बादल घिरे हों, हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू हो, और गांव की किसी नीम की डाल पर झूला पड़ा हो — उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के गांवों में कजरी तीज कुछ ऐसा ही नज़ारा लेकर आती है। यह तीज हरियाली तीज और हरतालिका तीज जितनी जानी-पहचानी भले न हो, लेकिन जिन इलाकों में मनाई जाती है, वहां इसका अपना अलग रंग है।

2026 में तारीख

इस साल कजरी तीज सोमवार, 31 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि को आती है, यानी हरतालिका तीज से करीब दो हफ्ते पहले।

कजरी गीत और नीमड़ी माता की पूजा

कजरी तीज

इस तीज का नाम ही “कजरी” गीतों से जुड़ा है — ये लोकगीत खासतौर पर राधा के कृष्ण के प्रति विरह और प्रेम को दर्शाते हैं। सावन की झड़ी में महिलाएं समूह बनाकर गांव की गलियों में या नीम के पेड़ के नीचे इकट्ठा होकर ये गीत गाती हैं, झूला झूलती हैं और एक-दूसरे को मेहंदी लगाती हैं। इसी दिन “नीमड़ी माता” की पूजा की परंपरा भी है, जहां नीम के पेड़ को देवी का रूप मानकर उसकी पूजा की जाती है — यह परंपरा खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में आज भी जीवित है।

बनारस और आसपास के इलाकों में तो कजरी को एक अलग संगीत शैली के रूप में भी जाना जाता है, जो सिर्फ इस त्योहार तक सीमित नहीं बल्कि पूरे सावन के महीने में गाई जाती है। मिर्जापुर की कजरी खासतौर पर प्रसिद्ध है, जहां हर साल कजरी गायन की प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं।

मिर्जापुर की कजरी और खेती से जुड़ाव

कजरी गीतों की जड़ें दरअसल खेती-किसानी के मौसम से भी जुड़ी मानी जाती हैं। सावन-भादो का महीना धान की रोपाई और बुवाई का समय होता है, और खेतों में काम करते हुए महिलाएं इन्हीं गीतों से अपनी थकान भुलाती थीं — यही परंपरा धीरे-धीरे त्योहार के रूप में ढल गई। मिर्जापुर में इस त्योहार को लेकर एक स्थानीय लोककथा भी प्रचलित है — कहा जाता है कि कांतित नरेश की बेटी कजली अपने पति से बेहद प्रेम करती थीं, और जब कभी वे अलग हुए, तो कजली ने विरह में जो मधुर गीत गाए, वही आगे चलकर “कजरी” कहलाए। उनकी मृत्यु के बाद पूरे क्षेत्र ने इन गीतों को उन्हीं की याद में जीवित रखा। आज हर साल आयोजित होने वाला मिर्जापुर का कजरी महोत्सव इसी लोक-परंपरा को आगे बढ़ाने का मंच बन चुका है, जहां आसपास के इलाकों से गायक और कलाकार अपनी प्रस्तुति देने आते हैं।

व्रत और मान्यता

महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना के साथ यह व्रत करती हैं — इस मायने में यह हरियाली तीज और हरतालिका तीज जैसी बाकी तीजों से मिलता-जुलता है। कुछ जगहों पर यह व्रत निर्जला रखा जाता है, तो कुछ जगहों पर फलाहार के साथ। परंपरा और परिवार के हिसाब से यह अलग-अलग हो सकता है, इसलिए घर में प्रचलित तरीके का पालन करना ही उचित माना जाता है।

शाम को घेवर, फेनी और सावन के अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं, जो इस मौसम की खास पहचान माने जाते हैं।

कजरी तीज

शुभकामना संदेश और गीतों की झलक

पारंपरिक शुभकामनाएं

  • कजरी तीज की हार्दिक शुभकामनाएं, आपका दांपत्य जीवन सुख-समृद्धि से भरा रहे।
  • सावन की बूंदों जैसा प्यार और नीम की छांव जैसा साथ आपके जीवन में सदा बना रहे।

लोकगीत की भावना में

  • सावन आया झूम के, कजरी गाई धूम से, रिमझिम बारिश के संग बीते दिन खुशियों से।
  • झूला झूले सखी सब, गाए कजरी के गीत, हर घर में बरसे खुशियां, यही मन की प्रीत।

छोटे स्टेटस

  • कजरी तीज मुबारक हो 🌧️
  • सावन की फुहार, तीज का त्योहार
  • झूला झूलो, कजरी गाओ, तीज मनाओ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कजरी तीज और हरियाली तीज में क्या फर्क है — यह सवाल अक्सर पूछा जाता है, क्योंकि दोनों सावन के आसपास ही आती हैं। हरियाली तीज श्रावण मास की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है, जबकि कजरी तीज भाद्रपद माह की कृष्ण तृतीया को आती है, यानी दोनों के बीच करीब दो हफ्तों का अंतर होता है।

यह त्योहार किन राज्यों में ज्यादा मनाया जाता है — मुख्यतः उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के कुछ हिस्सों में इसे पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता है, जबकि बाकी हिस्सों में यह उतना प्रचलित नहीं है।

एक और सवाल अक्सर पूछा जाता है कि क्या शहरों में रहने वाले लोग भी यह परंपरा निभा सकते हैं — बिल्कुल, आजकल कई शहरी परिवार भी घर पर छोटा झूला सजाकर, कजरी गीतों की रिकॉर्डिंग सुनकर और पारंपरिक पकवान बनाकर इस दिन को अपने तरीके से मनाते हैं, गांव जैसा माहौल न हो तो भी भावना वही रहती है।

आपका यह सावन कजरी के गीतों जैसा ही मीठा और यादगार रहे।

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